सारतरोच्चयः

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“सारतरोच्चयः” किस ग्रन्थ के स्वरूप को दर्शाता है? | अष्टांग हृदय | AIAPGET Ayurveda MCQ Explained
अष्टांग हृदय • वाग्भट • बृहत्त्रयी

“सारतरोच्चयः”
किस ग्रन्थ के स्वरूप को दर्शाता है?

अष्टांग हृदय • चरक-सुश्रुत का सार • विस्तृत व्याख्या
AIAPGET | BAMS | AMO Exam Ready

Q परीक्षा प्रश्न

“सारतरोच्चयः” निम्नलिखित में से किस एक ग्रन्थ के स्वरूप को दर्शाता है ?

A

अष्टांग हृदय

सही उत्तर (Correct Answer)
B

चरक संहिता

C

सुश्रुत संहिता

D

काश्यप संहिता

📜 मूल श्लोक (अष्टांग हृदय)

अग्निवेशादिकास्ते तु पृथक् तन्त्राणि तेनिरे ।
तेभ्योऽतिविप्रकीर्णेभ्यः प्रायः सारतरोच्चयः
क्रियतेऽष्टाङ्गहृदयं नातिसङ्क्षेपविस्तरम् ॥

— अष्टांग हृदय, सूत्र स्थान, अध्याय 1 (आयुष्कामीय अध्याय)

अन्वयार्थ / Meaning

अग्निवेश आदि आचार्यों ने अलग-अलग तन्त्रों की रचना की। उन अति-विप्रकीर्ण (बहुत बिखरे हुए) तन्त्रों से सारतर (उत्तम सार) का उच्चय (संग्रह) करके यह अष्टांग हृदय नामक ग्रन्थ बनाया गया है, जो न तो अत्यन्त संक्षिप्त है और न ही अत्यन्त विस्तृत।

📖 विस्तृत व्याख्या (Detailed Explanation)

क्यों अष्टांग हृदय?

आचार्य वाग्भट ने स्वयं अपने ग्रन्थ के आरम्भ में स्पष्ट कहा है कि उन्होंने पूर्ववर्ती तन्त्रों (मुख्यतः चरक संहिता एवं सुश्रुत संहिता) के बिखरे हुए ज्ञान से उत्तम सार (सारतर) का चयन करके उच्चय (संग्रह) किया है। इसीलिए अष्टांग हृदय को “सारतरोच्चयः” कहा जाता है।

शब्दार्थ विश्लेषण

सारतर

उत्तम सार, श्रेष्ठ अंश, essence of the best parts from earlier texts

उच्चयः

संग्रह, संकलन, collection / compilation of the essence

अतः सारतरोच्चयः = उत्तम सार का संग्रह। यह वाग्भट द्वारा अष्टांग हृदय के स्वरूप का स्वयं का वर्णन है।

अन्य विकल्प क्यों गलत हैं?

  • (B) चरक संहिता — यह मूल विस्तृत तन्त्र है (अग्निवेश तन्त्र पर आधारित)। इसे सारसंग्रह नहीं कहा जाता।
  • (C) सुश्रुत संहिता — शल्य प्रधान मूल तन्त्र है। वाग्भट ने इसे भी आधार बनाया, पर स्वयं को सारतरोच्चय नहीं कहा।
  • (D) काश्यप संहिता — कौमारभृत्य प्रधान ग्रन्थ है। “सारतरोच्चयः” विशेषण इससे सम्बद्ध नहीं है।

💡 परीक्षा में याद रखने के टिप्स

  • अष्टांग हृदय = नातिसङ्क्षेपविस्तरम् (न बहुत छोटा, न बहुत बड़ा)
  • यह बृहत्त्रयी का तीसरा ग्रन्थ है (चरक → सुश्रुत → वाग्भट)
  • अष्टांग हृदय को “आयुर्वेद का हृदय” भी कहा जाता है
  • याद रखने का सूत्र: “सारतरोच्चय = अष्टांग हृदय”

⚖️ बृहत्त्रयी की तुलना

ग्रन्थ आचार्य स्वरूप / विशेषता
चरक संहिता चरक (अग्निवेश) कायचिकित्सा प्रधान, विस्तृत मूल तन्त्र
सुश्रुत संहिता सुश्रुत शल्य प्रधान, विस्तृत मूल तन्त्र
अष्टांग हृदय वाग्भट सारतरोच्चयः, नातिसंक्षेपविस्तरम्

🔍 अतिरिक्त महत्वपूर्ण बिंदु

अष्टांग हृदय की विशेषताएँ

  • • 6 स्थान (सूत्र, शरीर, निदान, चिकित्सा, कल्प, उत्तर)
  • • कुल 120 अध्याय
  • • काव्य रूप में सरल भाषा
  • • सभी अष्टांगों का संतुलित वर्णन

परीक्षा में बार-बार पूछे जाने वाले बिंदु

  • • सारतरोच्चयः = अष्टांग हृदय
  • • नातिसङ्क्षेपविस्तरम् = अष्टांग हृदय
  • • हृदयमिव हृदयम् = अष्टांग हृदय
  • • बृहत्त्रयी में वाग्भट का स्थान

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